बुधवार, 25 जून 2014

भारत  के   राजनैतिक इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है के जन  कल्याण के कुछेक सफल प्रसंगों को छोड़ कर बाकि   ज्यादातर नीतियों , नेताओं , योजनाओं  की असफलताओं का ही वर्णन  है!
देश के निर्माण , विकास, मजबूती, और सुरक्षा के पहलुओं  पर  गर्व करने लायक कुछ भी नहीं है !
या यूँ कहे के अधिकाँशतय  नेताओं  की महत्वकांक्षाओं के दुष्परिणामों  से देश गर्सित रहा है !

देश के अस्तित्व को सुदृढ़ के लिए राजनैतिक इछाशक्ति , प्रतिबद्धता   दूरदृष्टि  हमेशा ही महत्वकांक्षाओं की बलि चढ़ती रही !

किस पर्कार वर्ग विशेष जनकल्याण व् समान अवसरों  को खरिज कर केवल लाभ हथियाने  के लिए नीतियों  और योजनाओं से खिलवाड़ करता रहा !
विभिन  काल  खंडो मैं किस पर्कार आवश्यकताओं को सपनो का लिबास पहना कर  उल्लू सीधा करती रही ! 
आम  जन  ठग्गा रह गया !