भारत के राजनैतिक इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है के जन कल्याण के कुछेक सफल प्रसंगों को छोड़ कर बाकि ज्यादातर नीतियों , नेताओं , योजनाओं की असफलताओं का ही वर्णन है!
देश के निर्माण , विकास, मजबूती, और सुरक्षा के पहलुओं पर गर्व करने लायक कुछ भी नहीं है !
या यूँ कहे के अधिकाँशतय नेताओं की महत्वकांक्षाओं के दुष्परिणामों से देश गर्सित रहा है !
देश के अस्तित्व को सुदृढ़ के लिए राजनैतिक इछाशक्ति , प्रतिबद्धता दूरदृष्टि हमेशा ही महत्वकांक्षाओं की बलि चढ़ती रही !
किस पर्कार वर्ग विशेष जनकल्याण व् समान अवसरों को खरिज कर केवल लाभ हथियाने के लिए नीतियों और योजनाओं से खिलवाड़ करता रहा !
विभिन काल खंडो मैं किस पर्कार आवश्यकताओं को सपनो का लिबास पहना कर उल्लू सीधा करती रही !
आम जन ठग्गा रह गया !

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