2015 एक और साल विशेष उपलब्धियां न कर पाने के मलाल में लगता है कुछ निराश सा गुजर रहा है !
कुछ साल अपनी गौरवपूर्ण उपलब्धियों के कारन हमेशा के लिए इतिहास में अपनी जगह बना लेते है ! उनकी छाप दशको , सदियों , तक चेतना , चिंतन , व् विचारों में गूंजती है !
कुछ साल घटनाओ के साक्षी की भूमिका में रहते हैं ! वहीं कुछ साल एक तरह की बेबसी में रहते हुए दर्द और निराशा के दौर से गुजरते हैं !
काल खंड देश व् परिस्थितिया भिन्न भिन्न होने के कारण घटनाये भी भिन्न भिन्न है और उनके प्रभाव भी !कोई भी समाज या संस्कृति उस प्रभाव से अछूती नहीं रह पाती , हालाँकि प्रभाव की अवधि तात्कालिक या दीर्घकालिक हो सकती है ! कुछ प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से मानवीय समाज को जागृत करते है कुछ अपर्त्यक्ष रूप में !
कुछ नयी अवधारणाओं , चेतनाओं व् परिभाषाओं की नींव रखते है जबकि कुछ पुरानी पृष्ठभूमि के संग ही आगे बढ़ जाते है ! महत्व के आधार पर ही साल अपनी पहचान बना पाते है !
२०१५ को अनोखी सफलताओं का साल तो नहीं कहा जा सकता लेकिन कुछ अप्रिय विफलताएं इसके खाते में जुड़ जरूर गयी हैं ! जिस होंसले की उड़ान पे ये साल निकला था वह भी अपनी मंज़िल तक पहुँच न पाने की कसक लिये है ! ऊर्जा के स्तर पे भी सामाजिक , व्यापारिक क्षेत्रों में कुछ खास उत्साहजनक बृद्धि देखने में नही आयी !
राजनितिक स्तर पर भी कई मुद्दे इसकी ताकत की पकड़ से बहार ही रहे ! मंहगाई , बेरोजगारी, आंतकवाद को काबू करने में साल लगभग विफल ही कहा जा सकता है !

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